Gyanvapi Case: हाई कोर्ट की टिप्पणी, ज्ञानवापी राष्ट्रीय महत्व का मसला, केंद्र व राज्य सरकार के जवाब गंभीर नहीं
Gyanvapi mosque case ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंदिर पक्ष की तरफ से पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। इसका जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 12 सितंबर को तय की है।
UP News: प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद (Gyanvapi Mosque Case) विवादित परिसर का सर्वे कराने संबंधी वाराणसी की अधीनस्थ अदालत के अंतरिम आदेश पर लगाई गई रोक की अवधि 30 सितंबर 2022 तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार पर टिप्पणी भी कि यह राष्ट्रीय महत्व का मसला है जिन पर उनका हलफनामा गंभीर नहीं है। राज्य सरकार ने तो पैरा तीन से लेकर 47 तक में सिर्फ दो शब्द 'नो कमेंट' लिखा है।
ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मंदिर पक्ष की तरफ से पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। याची अधिवक्ता ने इसका जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने यह समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 12 सितंबर नियत की।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद वाराणसी व अन्य की तरफ से दायर याचिका में वाराणसी के अपर जिला जज के आदेश की वैधता व सिविल वाद की पोषणीयता पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं।
पीठ ने राज्य सरकार व केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे को सही नहीं माना और अपर मुख्य सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से महानिदेशक आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के मार्फत व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, ‘राष्ट्रीय महत्व का मामला है और राज्य तथा भारत सरकार का हलफनामा स्केची है।’ मंदिर पक्ष के अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने कहा, ‘प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट में धार्मिक स्थान की प्रकृति बदलने पर रोक है। सिविल वाद में धार्मिक चरित्र बदलने की मांग नहीं की गई है।
विवाद, स्थान के धार्मिक चरित्र के निर्धारण का है। इसे साक्ष्य लेकर ही तय किया जा सकता है। इसलिए इस मामले में यह कानून लागू नहीं होगा।’ पीठ ने कहा कि मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट नहीं किया गया है। कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों से भी 10 दिन में जवाबी हलफनामा मांगा है।
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