Russia Ukraine war  रूस यूक्रेन मे आखिर कब से सुलग रही जंग की चिंगारी

Russia Ukraine war रूस यूक्रेन मे आखिर कब से सुलग रही जंग की चिंगारी

 


 रूस लंबे समय से यूक्रेन के यूरोपियन यूनियन के प्रति झुकाव की आलोचना कर रहा है लेकिन उनकी नाराजगी सोवियत यूनियन के विघटन के समय से पीवीसी के वर्ड एडिटर जॉन सिंपसन ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि रूस यूक्रेन में जंग की चिंगारी कैसे सुन कि रूस लंबे समय से यूक्रेन के यूरोपियन यूनियन के प्रति झुकाव की आलोचना कर रहा है लेकिन उनकी नाराजगी सोवियत यूनियन के विघटन के समय से पीवीसी के वर्ड एडिटर जॉनसन सुनने समझने की कोशिश की है कि आखिर क्या इसकी वजह है


इस बात को गलत ठहराना मुश्किल है कि साल  1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद दुनिया बदली है वह भी बेहतरी के लिए यूरोप में सोवियत संघ का खात्मा और पश्चिमी सभ्यता के आजादी की परिभाषा की विजय हुई इसके करीब 2 साल बाद क्रांति पहुंच चुकी थी



लेकिन खुफिया एजेंसी केजीबी के तख्तापलट की कोशिश के बाद बोरी सीएलसी सोवियत संघ के पुराने ढांचे को खत्म करने वाली और एक बेहतर लोकतंत्र को लाने वाले शख्स के तौर पर उभरे दिन के बाद आए पुतिन वह भी केजीबी के पूर्व अधिकारी से हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि वह सोवियत यूनियन को दोबारा खड़ा नहीं करना चाहते और वह दुनिया के दूसरे देशों से राजनयिक संबंधों को बखूबी निभाते थे एक ऐसी दुनिया में जहां अमेरिका का दबदबा था इस दौरान पुतिन बड़ी खामोशी से रूसी सेना को उसकी ताकत वापस दिलाने के लिए काम करते रहे जो बहुत कमजोर हो चुकी थी पुतिन रूस को दोबारा सुपर पावर बनाने के मिशन पर थे हालांकि पश्चिमी देशों के लिए वह कारोबार करने लायक सबसे ज्यादा कुछ नहीं थे



हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि वह सोवियत यूनियन को दोबारा खड़ा नहीं करना चाहते और वह दुनिया के दूसरे देशों से राजनयिक संबंधों को बखूबी निभाते थे एक ऐसी दुनिया में जहां अमेरिका का दबदबा था इस दौरान पुतिन बड़ी खामोशी से रूसी सेना को उसकी ताकत वापस दिलाने के लिए काम करते रहे जो बहुत कमजोर हो चुकी थी पुतिन रूस को दोबारा सुपरपावर बनाने के मिशन पर थे हालांकि पश्चिमी देशों के लिए वह कारोबार करने लायक सबसे ज्यादा कुछ नहीं दे सकता के साथ है



उसके पास वह सकारात्मकता के साथ है यह सोच कर कि दूध पश्चिमी उदार लोकतंत्र के साथ काम करेगा लेकिन उन्हें यह अहसास नहीं हुआ कि दोबारा अपनी ऐतिहासिक आक्रामक शैली में लौट रहा है सिर्फ बाहरी दुनिया के लिए ही नहीं अपनी आबादी के लिए भी और इतिहास के अपने दृष्टिकोण के मुताबिक उन चीजों को सही करने के लिए जिन्हें बाहरी दुनिया नहीं समझती खास तौर पर पुतिन को लगाओ सोवियत संघ के विघटन के समय जिस तरीके से यूक्रेन को आजादी मिली वह उन्हें पसंद नहीं थी और लुक समर्थन में ऑरेंज रिवॉल्यूशन उनके लिए अपमानजनक था साल 2014 तक पुतिन के सैनिक रमिया में घुस चुके थे जो यूक्रेन का हिस्सा था अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर उन्होंने वहां कब्जा कर लिया कुछ ही महीनों बाद मौत को मैंने उन्हें यह कहने का मौका दिया क्यों नहीं चाहिए लेकिन उन्होंने सीधे तौर से इंकार कर दिया


पश्चिमी देश पुतिन के साथ कारोबार करते रहे जैसे वह बस एक सामान्य नेता है यह अपने आप को धोखा देने जैसा था अप सी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन पुतिन का बड़ा समर्थक है जिनपिंग ने यूक्रेन पर कार्रवाई की निंदा नहीं की है दुनिया अचानक बदल गई है अब हम एक नए इलाके में हैं और दूर से यह एक शीत युद्ध जैसा दिख रहा है

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